ग्रामीण महिला सशक्तिकरण में सूक्ष्म वित्त की भूमिका
(म.प्र. के धार जिले के विशेष संदर्भ में)
विकास वर्मा’, तनु श्रीवास्तव’
पीएच. डी. षोधार्थी (अर्थषास्त्र), अर्थषास्त्र अध्ययन षाला, देवी अहिल्या विष्व विद्यालय इन्दौर
सरांश -
सूक्ष्म वित्त सूक्ष्म बचतों, सूक्ष्म विश्लेषण, सूक्ष्म पेंशन एवं आजीविका से संबंधित है। इसके सतत् विकास से ही भारत के ग्रामीण गरीबों का समूचित आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक सशक्तिकरण हुआ है। सूक्ष्म वित्त संस्था ग्रामीणों को व्यक्तिगत उपभोग, उत्पादन अथवा गतिविधिया, व्यवसाय आदि हेतु वित्त प्रदान करती है। सम्पूर्ण विश्व में सूक्ष्म वित्त व्यवस्था को महिला निर्धनता - उन्मूलन के एक सबल विकासात्मक आधार के रूप में जाना जाता है। देश में 1980 के बाद से सूक्ष्म वित्त संस्थाओं का विस्तार एवं विकास हुआ है। ग्रामीण महिलाओं को सामाजिक एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर सम्पूर्ण विकास के मार्ग तक पहुंचाने का कार्य इन्ही संस्थाओं के द्वारा किया जाता है।
प्रस्तुत अध्ययन द्वारा धार जिले की ग्रामीण महिलाओं की व्यवसायिक संरचना, आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति पर सूक्ष्म वित्त की प्रभावशीलता का अध्ययन किया गया है इस हेतु ग्रामीण महिलाओं से सामान्य जानकारी, ऋण उपभोग, मासिक आय, सामाजिक एवं आर्थिक प्रभाव आदि से संबंधित जानकारियां साक्षात्कार अनुसूची के माध्यम से एकत्रित की गई है। सूक्ष्म वित्त के माध्यम से महिलाओं के द्वारा सेवा क्षेत्र, विनिर्माण उद्योग क्षेत्र, पशुपालन, मुर्गीपालन, डेयरी उत्पाद आदि से संबंधित व्यवसायिक कार्य किए जाते है जिससे महिलाआंे में आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास, सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है। साथ ही महिलाओं में घरेलू बचत प्रवृत्ति आर्थिक सम्पन्नता एवं अतिरिक्त रोजगार की भी प्राप्ति होती है।
अतः सूक्ष्म वित्त संस्थाओं का ग्रामीण महिला उद्यमियों की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति तथा व्यवसायिक संरचना में महत्वपूर्ण भूमिका है यह वित्त संस्थाएंें बैंक लिंकेज कार्यक्रमों एवं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को जोड़कर उन्हें सशक्ति करण का कार्य करती है जो कि देश के आर्थिक एवं सामाजिक विकास हेतु एक महत्वपूर्ण कदम है।
प्रस्तावना-
भारतीय अर्थव्यवस्था में गरीबी, बेरोजगारी, आर्थीक, सामाजिक असमानता एक प्रमुख समस्या है। देश की आबादी का लगभग 50ः हिस्सा महिलाओं का है। विगत कुछ दशकों में महिलाओं की हिस्सेदारी में व्यापक वृद्धि हुई है।’’1 महिलाऐं वर्तमान में आत्मनिर्भर सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान हुआ है। किन्तु ग्रामीण क्षैत्रों में विशेषकर आदिवासी महिलायें आर्थिक एवं सामाजिक दृष्टि से आज भी पिछड़ी हुई दशा में है। आदिवासी ग्रामीण महिलाऐं मुख्य रूप से कृषि कार्य ही करती है। कम मजदूरी एवं अधिक श्रम के कारण इनकी आर्थिक व सामाजिक स्थिति दयनीय रहती है। समाज एवं राष्ट्र की प्रगति के लिए नारी शक्ति का विशेष महत्व है। देश का वास्तविक विकास महिलाओं के विकास पर ही निर्भर करता है। केन्द्र सरकार एवं की राज्य सरकारों ने महिलाओं के आर्थिक सुधार एवं सामाजिक विकास हेतु अनेक प्रयास किए है।
इसके अन्तर्गत ’’सूक्ष्म वित्त’’ एक महत्वपूर्ण प्रयास है।’’2 सम्पूर्ण विश्व में सूक्ष्म वित्त व्यवस्था को निर्धनता उनमूलन के एक सबल विकासात्मक आधार के रूप में माना जा रहा है। नाबार्ड के विशेष प्रयास से सर्वाधिक निर्धनता विशेषकर ग्रामीण महिलाओं में आथर््िाक-सामाजिक सशक्तिकरण हुआ है। अतः महिलाएं आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी हुई है।’’3
सूक्ष्म वित्त सूक्ष्म बचतों, सूक्ष्म बीमा, सूक्ष्म विश्लेषण, सूक्ष्म पेंशन एवं आजिविका से संबंधित है। इसके सतत् विकास से ही भारत के ग्रामीण गरीबों का समूचित आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक सशक्तिकरण हुआ है। सूक्ष्म वित्त के अंतर्गत महिलाऐं स्वयं आत्मनिर्भर होकर, स्वयं की अभिरूचि के अनुसार व्यवसाय संचालित करती है।’’4 सूक्ष्म वित्त वित्तीय सेवाओं की एक शाखा होती है, जो कि लोगों की व्यक्तिगत उपभोग, उत्पादन अथवा गतिविधियाँ, व्यवसाय आदि हेतु वित्त प्रदान करती है। देहा में सूक्ष्म वित्त के द्वारा विशेषकर ग्रामीण महिलाओं को ’’स्वयं सहायता समूह’’ के माध्यम से जोड़कर उनका आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान किया गया है। सूक्ष्म वित्त के द्वारा ग्रामीण क्षैत्रों में गैर कृषि व्यवसाय संचालित किए है। धार जिले के ग्रामीण क्षैत्रों में महिलाओं का ’’सूक्ष्म वित्त संस्थाओं’’ के माध्यम से आर्थिक विकास किया गया है। स्वयं सहायता समूह एवं ‘‘बैंक लिन्केज कार्यक्रमों‘‘ के द्वारा महिलाओं को वित्तिय सहायता दी गई है। इस दृष्टि से महिलाओं के द्वारा अनेक व्यवसाय जैसे - आटाचक्की, झाडू बनाना, मत्स्य पालन, मुर्गीपालन, किराना दुकान, कास्मेटिक दुकान, दुग्ध व्यवसाय, मध्यान्ह भोजन बनाना आदि संचालित किए हैं। इसके फलस्वरूप ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति में सुधार हुआ है। सूक्ष्म वित्त के द्वारा राष्ट्रीकृत बैंक, गैर सरकारी संगठन समूह के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार प्रदान करते हैं।’’5
प्रस्तुत अध्ययन धार जिले के सूक्ष्म वित्त का ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक-सामाजिक स्थिति पर प्रभावों का विश्लेषण है।
अध्ययन का उद्देश्य -
प्रस्तुत अध्ययन का मुख्य उद्देश्य अध्ययन क्षेत्र में सूक्ष्म वित्त संस्थाओं द्वारा संचालित स्वयं सहायता समूह का महिला सशक्तिकरण में भूमिका एवं प्रभावों का अध्ययन करना है।
1. सूक्ष्म वित्त का ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक एवं व्यवसायिक कार्यरत स्थिति का विश्लेषण करना।
2. सूक्ष्म वित्त के कारण महिलाओं की सामाजिक स्थिति में परिवर्तन का अध्ययन करना।
3. सूक्ष्म वित्त की ग्रामीण क्षेत्रों में समस्या का पता लगा कर उचित समाधान प्रस्तुत करना।
अध्ययन विधि -
प्रस्तुत अध्ययन हेतु मध्यप्रदेश के धार जिले का चयन किया है। जिले की 7 तहसिलों (धार, बदनावर, मनावर, गंधवानी, धरमपुरी, सरदारपुर और कुक्षी) में बैंक लिंकेज प्रोग्राम एवं गैर सरकारी संगठन द्वारा संचालित स्वयं सहायता समूह से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं का चयन किया जाना है। इस हेतु जिले के कुल 10 स्वयं सहायता समूह एवं प्रत्येक समूह से 5-5 महिलाओं का चयन सुविधानुसार पद्धति से किया है। इस प्रकार अध्ययन हेतु कुल 10 स्वयं सहायता समूह से कुल 50 महिलाओं का चयन किया है।
आंकड़ों का एकत्रिकरण एवं विश्लेषण -
प्रस्तुत अध्ययन हेतु प्राथमिक समंकों का उपयोग किया है। इनका एकत्रीकरण हेतु साक्षात्कार अनुसूची का उपयोग किया है। धार जिले में संचालित स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं से सामान्य जानकारी आयु, शैक्षणिक स्थिति, आय, व्यवसायिक सरलता, ऋण स्त्रौत, ऋण उपभोग आदि से सम्बन्धित जानकारी एकत्रित की है।
आंकड़ों का विश्लेषण -
तालिका 1.1 सामान्य जानकारी
आयु आवृत्ति प्रतिशत
20 वर्ष से कम 10 20ः
20-40 वर्ष 32 64ः
40 वर्ष से अधिक 8 16ः
50
जाति
अनुसूचित जाति 14 28ः
अनुसूचित जनजाति 28 56ः
पिछड़ा वर्ग 05 10ः
सामान्य 03 06ः
50
शैक्षणिक स्थिति
अशिक्षित 29 58ः
माध्यमिक स्तर 12 24ः
हा. स्कूल/ हा. सेकेण्ड्री 06 12ः
स्नातक या अधिक 03 06ः
50
सूक्ष्म वित्त संस्था से ऋण लेने से पूर्व आय स्तर
3000 से कम 25 50ः
3000 - 5000 14 28ः
5000 - 7000 07 14ः
7000 - से अधिक 04 08ः
50
सूक्ष्म वित्त संस्था से ऋण लेने से पश्चात आय स्तर
3000 से कम 07 14ः
3000 - 5000 11 22ः
5000 - 7000 17 34ः
7000 - से अधिक 15 30ः
50
स्त्रोत:- सर्वेक्षित आंकड़े
प्रस्तुत तालिका में धार जिले में सूक्ष्म वित्त के अंतर्गत स्वयं सहायता से जुड़ी महिलाओं की सामान्य जानकारी दी गई है। तालिका में महिलाओं की आयु संबंधी जानकारी से स्पष्ट है कि 20-40 वर्ष की महिलाऐं सर्वाधिक 64ः है, जबकि 40 वर्ष से कम आयु वर्ग वाली महिलाऐं 16ः सबसे कम है। जाति आधार वर्गीकरण में अनु. जनजाति वर्ग की 56ः महिलायें सर्वाधिक है जबकि सामान्य एवं अ.पि. वर्ग की क्रमशः 6ः एवं 10ः महिलाऐं हैं। शैक्षणिक स्थिति की जानकारी से स्पष्ट होता है कि सर्वाधिक 58ः महिलाऐं निरक्षर है। माध्यमिक स्तर तक शिक्षा प्राप्त महिलाऐं 24ःए स्नातक या अधिक तक शिक्षा प्राप्त महिलाऐं 6ः है। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद महिलाओं की मासिक आय संबंधित जानकारी एकत्रित की गई है। इसमें पाया गया कि स्वयं सहायता समूह में जुड़ने से पूर्व महिलाओं की आय स्तर बहुत निम्न था। अतः 3000 से कम आय प्राप्त करने वाली महिलायें सर्वाधिक 50ः थी। जबकि 7000 से अधिक आय प्राप्त करने वाली महिलायें सबसे कम 8ः थी। सूक्ष्म वित्त संस्थाओं से ऋण लेने के पश्चात महिलाओं की मासिक आय स्तर में व्यापक परिवर्तन हुआ है। अतः स्पष्ट है कि सर्वाधिक 17ः महिलाऐं 5000.7000 रू. मासिक आय प्राप्त करती है। जबकि 3000 से कम आय प्राप्त करने वाली महिलाओं का प्रतिशत सबसे कम 14ः है।
तालिका क्र. 2
सूक्ष्म वित्त से संचालित ग्रामीण महिलाओं की व्यवसायिक संरचना
1. आटा चक्की 06 12
2. मत्स्य पालन 03 6
3. मुर्गीपालन 04 8
4. किराना दुकान 06 12
5. दुग्ध व्यवसाय 04 8
6. झाडू-टोकनी बनाना 08 16
7. टेलरिंग 03 3
8. आगरबत्ती बनाना 04 8
9. पापड़-बढ़ी बनाना 03 6
10. मध्यान भोजन बनाना 07 14
11. अन्य 04 8
स्त्रोत:- सर्वेक्षित आंकड़े
प्रस्तुत तालिका में धार जिले में सूक्ष्म वित्त के माध्यम से स्वयं सहायता समूह के द्वारा ग्रामीण महिलाओ के द्वारा संचालित व्यवसायों का विश्लेषण किया गया है। तालिका से स्पष्ट है कि ग्रामीण महिलाऐं निर्माण क्षैत्र, सेवा क्षैत्र आदि कार्य करती है। इनके द्वारा वनोपज उत्पादों, व्यक्तिगत व्यवसाय, मुर्गीपालन, डेयरी उत्पाद अन्य व्यवसाय किया जाता है। स्पष्ट हेै कि महिलायें आटा चक्की ;6ःद्धए मत्स्य पालन ;3ःद्धए मुर्गी पालन ;4ःद्ध ए झाडू-टोकनी बनाना ;08ःद्धए आगरबत्ती बनाना ;04ःद्ध ए मध्यान भोजन बनाना ;07ःद्धए एवं ;04ःद्ध अन्य कार्य किया जाता है।
तालिका क्र. 3
ग्रामीण महिलाओं द्वारा ऋण उपभोग संबंधी जानकारी
क्र. ऋण उपभोग आवृत्ति प्रतिशत
2. घरेलू उपभोग 5 10
3. स्वास्थ्य 3 06
4. उत्सव/त्यौहार 2 04
5. पुराने ऋणों का भुगतान 8 16
6. व्यवसाय संचालन 29 58
7. बच्चों की शिक्षा एवं अन्य 3 06
50
स्त्रोत:- सर्वेक्षित आंकड़े
प्रस्तुत तालिका में धार जिले की ग्रामीण महिलाओं के द्वारा सूक्ष्म वित्त संस्थाओं के द्वारा दिये जाने वाले ऋण का उपभोग अथवा उपयोग संबंधी जानकारी प्राप्त की गई है। स्पष्ट है कि सर्वाधिक 58ः महिलाओं के द्वारा ऋण राशि का उपयोग स्वयं के उद्योग स्थापित करने हेतु किया जाता है। जबकि 10ः महिलाओं के द्वारा घरेलू उपभोग तथा 16ः महिलाओं द्वारा पुराने ऋणों का भुगतान हेतु किया जाता है। शेष महिलाओं द्वारा ऋण राशि का उपयोग स्वास्थ्य, उत्सव/त्यौहार, बच्चों की शिक्षा एवं अन्य कार्यों हेतु किया जाता है।
तालिका - 4
सूक्ष्म वित्त का ग्रामीण महिलाओं में आर्थिक एवं सामाजिक प्रभावशीलता
1. बचत प्रवृत्ति 41 82ः
2. आर्थिक सम्पन्नता 43 86ः
3. अतिरिक्त रोजगार 27 54ः
4. ऋणों से मुक्ति 35 70ः
5. आत्म निर्भरता एवं आत्मविश्वास 45 90ः
6. सामाजिक प्रतिष्ठा 42 84ः
स्त्रोत:- सर्वेक्षित आंकड़े
प्रस्तुत तालिका में धार जिले मे सूक्ष्म वित्त के द्वारा स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आर्थिक व सामाजिक स्थिति पर प्रभावशीलता का विश्लेषण किया गया है। सूक्ष्म वित्त के कारण ग्रामीण महिलाओं की बचत प्रवृत्ति में 82ः वृद्धि आर्थिक सम्पन्नता 86ःए अतिरिक्त रोजगार की प्राप्ति 54ः ए पुराने ऋणों अथवा ऋणों से छुटकारा 70ःए आत्मनिर्भरता एवं आत्मविश्वास में 90ः वृद्धि तथा सामाजिक प्रतिष्ठता 42ः महिलाओं में हुई है। अतः सूक्ष्म वित्त के परिणामस्वरूप महिलाओं के द्वारा स्वयं का रोजगार स्थापित करने से आर्थिक व सामाजिक स्थिति पर सकारात्मक प्रभाव होता है।
निष्कर्ष:-
सूक्ष्म वित्त के द्वारा महिलाओं में आत्मनिर्भरता, स्वरोजगार की भावना, सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है। यह एक ऐसी संस्था है, जिसके द्वारा महिलाऐं अपनी रूचि के अनुसार स्वयं का व्यवसाय संचालित करती है। शासन के द्वारा बैंक लिकेज कार्यक्रमों एवं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु प्रयास किये गए है। प्रस्तुत अध्ययन के माध्यम से निष्कर्ष रूप में निम्न तथ्य उभरे हैं:-
ऽ सूक्ष्म वित्त के माध्यम से जुड़ी धार जिले की महिलाओं में आयु संबंधि जानकारी में सर्वाधिक 64ः महिलाऐं 20.40 आयु वर्ग वाली हैं। जबकि 40 वर्ष से अधिक आयु वर्ग वाली महिलाऐं सबसे कम 16ः हैं। अतः स्पष्ट है कि 20.40 वर्ष की आयु वाली महिलायें सर्वाधिक स्वयं सहायता समूह से जुड़कर कार्य करती है।
ऽ अध्ययन में पाया गया कि सर्वाधिक 56ः महिलायें अनुसूचित जनजाति वर्ग की, जबकि अनुसूचित जाति 28ःए अन्य पिछड़ा वर्ग 10ः तथा सामान्य वर्ग की सबसे कम महिलायें 6ः है। क्योंकि धार जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश जनजाति वर्ग के लोग ही निवास करते हैं।
ऽ अध्ययन में शैक्षणिक स्थिति से स्पष्ट है कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं में साक्षरता का अभाव पाया जाता है। सर्वाधिक 58ः महिलायें निरक्षर हैं। जबकि स्नातक या अधिक शिक्षा प्राप्ति महिलायें केवल 6ः हैं। अतः निम्न शैक्षणिक स्तर के कारण ही स्वयं सहायता समूह का पूर्ण विकास नहीं हो पाया है। जो कि अपने उद्देश्य पूरे नहीं कर पाते हैं।
ऽ सूक्ष्म वित्त के द्वारा महिला उद्यमियों की मासिक आय में परिवर्तन हुआ है। सर्वाधिक आय का स्तर (5000-7000) प्राप्त करने वाली महिलायें 34ः है। जबकि 3000 से कम आय प्राप्त करने वाली महिलायें 14ः हैं। 22ः महिलायें 3000-5000 रू. मासिक आय जबकि 7000 से अधिक आय प्राप्त करने वाली महिलायें 30ः हैं।
ऽ प्रस्तुत अध्ययन में सूक्ष्म वित्त के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं की व्यवसायिक संरचना का विश्लेषण किया है। सूक्ष्म वित्त प्राप्ति से पूर्व महिलाओं का मुख्य व्यवसाय कृषि अथवा कृषि मजदूरी था। किंतु सूक्ष्म वित्त के बाद महिलाओं के द्वारा विनिर्माण, सेवाक्षेत्र आदि से संबंधित जैसे आटा चक्की, किराना दुकान, टेलरिंग, कास्मेटिक दुकान, मध्यान्ह भोजन बनाना, झाड़ू टोकनी बनाना, मुर्गी पालन, डेयरी व्यवसाय, मत्स्य पालन आदि से संबंधित कार्य किये जाने लगे। अतः महिलाओं की व्यवसायिक संरचना में सूक्ष्म वित्त के कारण परिवर्तन होता है।
ऽ सूक्ष्म वित्त संस्थाओं के द्वारा महिला उद्यमियों को अनेक कार्यों एवं उद्देश्यों हेतु ऋण प्रदान किया जाता है। किंतु मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आत्म निर्भर बनाकर उनमें सशक्तिकरण लाना है।
सूक्ष्म वित्त संस्थाओं द्वारा जो ऋण प्रदान किया जाता है उनमें से सर्वाधिक 58ः महिलाओं द्वारा ऋण राशि का उपयोग स्वयं व्यवसाय संचालन हेतु किया घरेलू उपभेाग हेतु 10ः महिलायें ऋण का उपयोग किया। जबकि 16ः महिलायें पुराने ऋणों की अदायगी हेतु किया।
ऽ प्रस्तुत अध्ययन के द्वारा धार जिले की ग्रामीण महिलाओं को सूक्ष्म वित्त के माध्यम से स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं की आर्थिक व सामाजिक स्थिति पर प्रभावशीलता का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट है कि सूक्ष्म वित्त के द्वारा ग्रामीण महिलाओं में स्वावलंबन तथा आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है।
82ः महिला उद्यमियों में बचत की प्रवृत्ति बढ़ी है। जबकि 86ः महिलाओं में आर्थिक सम्पन्नता आई है। सूक्ष्म वित्त के द्वारा महिलायें मुख्य व्यवसाय के अतिरिक्त अन्य व्यवसाय भी कर सकती हैं। लगभग 54ः महिलाओं के द्वारा अतिरिक्त रोजगार भी किया जाता है। 70ः महिलाओं का मत है कि सूक्ष्म वित्त संस्थाओं द्वारा प्रदत्त ऋणों से उनके पुराने ऋणों से मुक्ति मिली है।
ऽ सूक्ष्म वित्त संस्थाओं के द्वारा महिलाओं की सामाजिक प्रवृत्तियों में भी व्यापक परिवर्तन हुआ है। अध्ययन में पाया गया कि धार जिले की लगभग 90ः महिला उद्यमियों में आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है। जबकि सामाजिक प्रतिष्ठा व दायित्वों में 82ः महिलाओं में वृद्धि हुई है।
ऽ अतः प्रस्तुत अध्ययन से स्पष्ट होता है कि सूक्ष्म वित्त संस्थाओं का ग्रामीण महिला उद्यमियों की व्यवसायिक संरचना, आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति की मजबूती में महत्वपूर्ण भूमिका है। महिलाओं के द्वारा व्यवसाय संचालित किये जाते हैं। जिससे उनमें आर्थिक सम्पन्नता, सामाजिक प्रतिष्ठा, बचत प्रवृत्ति आदि होती है। सूक्ष्म वित्त संस्थाओं को ग्रामीण महिला निर्धनता-उन्मूलन के एक सबल विकासात्मक आधार के रूप में माना जाता है। अतः इन संस्थाओं के द्वारा ही वर्तमान समय में महिला सशक्तिकरण का मार्ग संभव हो पाया है।
समस्या -
(1) ग्रामीण महिलाओं में शिक्षा की कमी होती है। जिसके कारण महिलायें अपने अधिकारों एवं शक्ति का पूर्ण रूप से उपयोग नहीं कर पाती है।
(2) ग्रामीण क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम सूक्ष्म वित्त संस्थाएं कार्यरत हैं। जिसके कारण यह अपना उद्देश्य पूरा नहीं कर पाती है।
(3) सूक्ष्म वित्त संस्थाओं के कर्मचारीयों एवं अधिकारियों का व्यवहार ग्रामीण महिलाओं के प्रति कठोर एवं दोषपूर्ण होता है।
(4) ग्रामीण महिलाओं को सूक्ष्म वित्त संस्थाओं द्वारा जो वित्त प्रदान किया जाता है। सामान्यतः वह राशि आवश्यकता अथवा व्यवसाय संचालन की दृष्टि से कम होती है।
(5) महिला उद्यमियों के द्वारा जो माल निर्मित किया जाता है। उसकी विपणन की स्थानीय स्तर पर विशेष सुविधायें नहीं होती है।
(6) उद्यमियों को माल निर्माण में कच्चे माल की आवश्यकता होती है। जो कि आसानी से स्थानीय क्षेत्रों में उपलब्ध नहीं होता है।
सुझाव:-
(1) ग्रामीण महिलाओं को सूक्ष्म वित्त संस्थाओं के द्वारा उद्यम स्थापित करने हेतु विशेष प्रशिक्षण एवं शिवीर आयोजित किये जाने चाहिए।
(2) महिला उद्यमियों को सूक्ष्म वित्त संस्थाओं द्वारा आवश्यकता अनुसार पर्याप्त राशि दी जानी चाहिए।
(3) उद्यम संचालन हेतु आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता स्थानीय स्तर पर एवं पर्याप्त मात्रा में की जानी चाहिए।
(4) ऋण प्राप्ति की प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए।
(5) महिला उद्यमियों को प्रदान ऋण राशि को उचित उपयोग हेतु संस्थाओं के द्वारा प्रेरित किया जाना चाहिए।
संदर्भ ग्रंथ सूची:-
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11. श्रीराम वी.पी. (2009) - सूक्ष्म वित्त, स्वयं सहायता समूह एवं महिला सशक्तिकरण।
Received on 03.12.2011
Revised on 10.01.2012
Accepted on 15.02.2012
© A&V Publication all right reserved
Research J. Humanities and Social Sciences. 3(2): April-June, 2012, 228-232